बिहार में वर्तमान विपक्ष बहुत ही कमजोर और लाचार है. सरकार के सामने सीना तानकर खड़ा रहना दूर की बात आंख से आंख मिलाकर बात नहीं करता है. पिछले दस दिनों से BPSC अभ्यर्थी सड़क पर हैं. लाठी- गाली खा रहे हैं विपक्ष के मुखिया फोटो खिंचावाकर क्रिसमस मनाने चले जाते हैं. उनको लगता है फोटो खिंचवाने से मेरा काम हो गया. अगर आप इन छात्रों के समर्थन में खड़े रहते आज सरकार बाप-बाप चिल्लाती. एक भी कार्यक्रम मुख्य विपक्षी दल ने छात्रों के पक्ष में और सरकार के विरोध में नहीं किया है. ये कर भी नहीं सकते हैं क्योंकि इनको बनना है उपमुख्यमंत्री. ऐसे में सरकार के मुखिया के खिलाफ बोलकर अपना रास्ता क्यों खराब करेंगे.
दूसरा विपक्ष बनने का दावा प्रशांत किशोर करते हैं. प्रेस नोट पर बड़ी बड़ी बात करते है पर मैदान में दस मिनट से ज्यादा नहीं रुकते है. छात्रों का मार्च होगा तो हम आगे रहेंगे. साहब अपने बड़े हाउस में रहे. चार कदम चल पड़ते तो लाठी खाने का डर था आसानी से गिरफ्तारी दे देते, छात्रों के आंदोलन को बल मिलता. आज देखा की रहमान सर और खान सर चले गए हैं तो अपना दांव फेंकने छात्रों के बीच किसी सर के माध्यम से पहुंचे थे. ऐलान किया है कल छात्र संसद लगाएंगे. ये सब राजनीतिक स्टंट है. इस तरह के कार्यक्रम BPSC अभ्यर्थी तो कर रहे है. कुछ अलग कीजिये जिससे बात बने.
एक पप्पू यादव हैं. उन्होंने कुछ हद तक मेहनत की है. वो भी बिन पेंदी के लोटा है. सरकार इनको बहुत हल्के में लेती है. ये व्यक्ति कांग्रेस से जुड़ा रहता और यहां टिक जाता कुछ हद तक बात बनती. ये टिके पर ये खुद टिकाऊ नहीं है.
विपक्ष में कोई पार्टी काम करती है वो भाजपा है. जुलाई 2023 में इसी गर्दनीबाग में शिक्षक अभ्यर्थी और नियोजित शिक्षक धरना पर बैठे थे. भाजपा के बड़े नेताओं ने सिर्फ जाकर फोटो नहीं खिचवाया बल्कि सड़क पर उतर कर आंदोलन किया, जिसमें एक भाजपा कार्यकर्त्ता की मौत भी हो गई m. उस दौरान लगा सरकार के सामने कोई तो सीना तानकर खड़ा है.
ये तो सही है पार्टी और नेता अपनी रोटी सेकेंगे लेकिन जिस आग में रोटी बनेगी उसी आग से आंदोलन को गर्माहट मिलेगी. तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर को BPSC अभ्यर्थियों की मांग जायज लगती है तो सरकार के सामने सीना तानकर खड़े हो जाइये. सरकार को लगे सिर्फ हजार छात्र नहीं विपक्ष भी मांग कर रहा है. अभी सरकार को लग रहा है ये सब फोटोबाजी है.
विपक्ष मजबूत होगा तब सरकार मजबूर होगी. बिहार में विपक्ष आंकड़ों से लेकर हर क्षेत्र में मजबूत है बस उसके नेतृत्व को मजबूत होना है.
यह लेख सुजीत पाण्डेय की निजी राय है

