निजी स्कूल और “पूर्ण पैकेज” की अधूरी कहानी
आजकल निजी स्कूल सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं रहे, बल्कि एक “ऑल-इन-वन शॉपिंग मॉल” बन चुके हैं। एडमिशन लेते ही ऐसा लगता है जैसे बच्चे का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का पैकेज बुक हो गया हो। किताबें? स्कूल से लो। कॉपी? स्कूल से लो। पेन-पेंसिल? स्कूल से लो। यूनिफॉर्म? वही से लो। यहाँ तक कि…

