विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के गहन पुनर्निरीक्षण को लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है. इसी मुद्दे कों लेकर 8 जुलाई मंगलवार कों जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला। जनसुराज पार्टी ने इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
चुनाव आयोग का निर्णय गैर-जरूरी और जनविरोधी है – उदय सिंह ( राष्ट्रीय अध्यक्ष, जनसुराज )
बता दें की चुनाव आयोग से मिलकर निकलने के बाद पत्रकारों से जनसुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा की चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए है 11 दस्तावेज जबकि “इनमें कई ऐसे दस्तावेज हैं, जिन्हें एक साधारण व्यक्ति के लिए जुटा पाना बेहद मुश्किल है. इससे बड़े पैमाने पर लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है.” उन्होंने इस प्रक्रिया को जटिल, गैर-जरूरी और जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे आम मतदाता भ्रम में पड़ सकता है और चुनावी पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है.
चुनाव आयोग भाजपा का विभाग – उदय सिंह ( राष्ट्रीय अध्यक्ष, जनसुराज )
राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने आगे कहा की , “हम लोग हमेशा यह कहते रहे हैं कि चुनाव आयोग ने खुद को बहुत हद तक समझौते की स्थिति में डाल दिया है। वह भाजपा के एक विभाग की तरह काम कर रहा है। चुनाव आयोग अपनी स्वतंत्रता खोता जा रहा है और जो विश्वास जनता को था, वह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
मतदाता गहन पुनर्निरीक्षण का कोई औचित्य ही नहीं है
उदय सिंह ने आगे कहा की बिहार में विधानसभा चुनाव होने में 2–3 महीना ही बाकि है , ऐसे में गहन पुनर्निरीक्षण का कोई औचित्य नहीं है। लेकिन यदि चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है, तो हम औपचारिक रूप से अपनी बात आगे रखेंगे।
न्यायालय में मामला लंबित, जल्द ही आएगा फैसला
उदय सिंह ने कहा की जन सुराज पार्टी ने इस मुद्दे को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी है. हमें उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय से 2–3 दिनों में इस मुद्दे पर कोई महत्वपूर्ण फैसला आएगा और यह सारा विवाद समाप्त हो जाएगा।
जनसुराज के वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, प्रदेश महासचिव किशोर कुमार मुन्ना, और पूर्व मंत्री आर.सी.पी. सिंह उपस्थित थे।

