खरमास में शपथ: मुहूर्त या सियासी रणनीति? Nitish Kumar के फैसले पर उठे सवाल

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बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए आज राज्यसभा सांसद पद की शपथ ली। खास बात यह रही कि उन्होंने यह शपथ अकेले ली, जबकि बिहार से निर्वाचित अन्य सांसद खरमास समाप्त होने के बाद शपथ लेंगे।जानकारी के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Navin, जेडीयू के Ramnath Thakur, आरएलएम सुप्रीमो Upendra Kushwaha और भाजपा नेता Shivesh Ram 16 अप्रैल से शुरू होने वाले राज्यसभा के विशेष सत्र में शपथ लेंगे।

क्यों उठा विवाद?

नीतीश कुमार का खरमास के दौरान शपथ लेना राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार खरमास को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह फैसला परंपराओं से अलग है या इसके पीछे कोई राजनीतिक मजबूरी है।

क्या है सियासी गणित?

सूत्रों के मुताबिक, एनडीए चाहती है कि बिहार में 15 अप्रैल तक नई सरकार का गठन हो जाए। इसी रणनीति के तहत नीतीश कुमार को पहले शपथ दिलाई गई है। दरअसल, 14 अप्रैल को खरमास समाप्त हो रहा है और 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। इस सत्र में Nari Shakti Vandan Adhiniyam (महिला आरक्षण बिल) पेश किया जाना है, जिसमें सभी बड़े नेताओं की मौजूदगी जरूरी मानी जा रही है।

आगे क्या?

दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट की अंतिम बैठक करेंगे। इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर सकते हैं। इसके बाद वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।