सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। उनके साथ जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
बिहार में लंबे समय से सक्रिय भारतीय जनता पार्टी के लिए यह ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा है। हालांकि इस बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के बावजूद शपथ ग्रहण समारोह में अपेक्षित उत्साह देखने को नहीं मिला।
समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इतना ही नहीं, बीजेपी शासित राज्यों के किसी भी मुख्यमंत्री की मौजूदगी भी नजर नहीं आई, जिससे चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के पटना पहुंचने और लोकभवन में रात्रि विश्राम की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अंतिम समय में उनका कार्यक्रम नहीं बन सका। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के कुछ नेता, जिनमें जेपी नड्डा और नितिन नवीन शामिल थे और समारोह में मौजूद रहे।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए उनके नेतृत्व में बिहार के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की उम्मीद जताई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इसने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी आलाकमान इस नेतृत्व परिवर्तन से पूरी तरह संतुष्ट है या नहीं।
गौरतलब है कि सम्राट चौधरी उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो उपमुख्यमंत्री पद से सीधे मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं। इससे पहले 1967 में उपमुख्यमंत्री बने जननायक कर्पूरी ठाकुर ने 1977 में मुख्यमंत्री पद संभाला था।
अब देखना यह होगा कि सम्राट चौधरी अपने नेतृत्व में बिहार की राजनीति और विकास को किस दिशा में ले जाते हैं।

