मीठापुर-सिपारा एलिवेटेड रोड उद्घाटन: प्रशांत किशोर की गैरमौजूदगी चर्चा में

रक्षाबंधन के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में मीठापुर-महुली-पुनपुन परियोजना के तहत मीठापुर से सिपारा तक बने एलिवेटेड पथ का लोकार्पण किया। इस दौरान कई मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक श्याम रजक, विधायक अरुण मांझी, विधान पार्षद नवल किशोर यादव, विधान पार्षद रवीन्द्र प्रसाद सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।


जिस क्षेत्र में कार्यक्रम, वहां के विधायक ही नजर नहीं आए

इस पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर की गैरमौजूदगी को लेकर है।
मीठापुर और सिपारा बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। ऐसे में जिस विधानसभा क्षेत्र में परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आता है, वहां के स्थानीय विधायक का कार्यक्रम में मौजूद नहीं होना चर्चा का विषय बन गया है।


बिहार के सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचना और आमंत्रण देने को लेकर प्रोटोकॉल संबंधी निर्देश रहे हैं। विधानसभा के रिकॉर्ड में भी ऐसे मामलों में स्थानीय विधायक को कार्यक्रम की विधिवत सूचना देने की अपेक्षा का उल्लेख मिलता है।

क्या प्रशांत किशोर को आमंत्रण नहीं मिला?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था?अगर उन्हें आमंत्रित किया गया था, तो फिर वह कार्यक्रम में शामिल क्यों नहीं हुए?और अगर उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था, तो इसकी वजह क्या थी?फिलहाल इसको लेकर विभाग या प्रशांत किशोर की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

उद्घाटन में क्या-क्या हुआ?

मुख्यमंत्री ने मीठापुर बस स्टैंड को मीठापुर गोलंबर से जोड़ने वाले फ्लाईओवर, पहुंच पथ और सेवा पथ का भी लोकार्पण किया।इसके साथ ही मीठापुर-महुली-पुनपुन परियोजना के तहत मीठापुर से सिपारा तक करीब 2.1 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड पथ का भी उद्घाटन किया गया। परियोजना का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात को सुगम बनाना और मीठापुर-सिपारा मार्ग पर जाम के दबाव को कम करना है।

क्या प्रोटोकॉल का पालन हुआ?


स्थानीय विधायक को सरकारी कार्यक्रम में आमंत्रित करने और उनका नाम आमंत्रण पत्र या शिलालेख पर शामिल करने को लेकर अलग-अलग राज्यों में प्रोटोकॉल संबंधी निर्देश और विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में सीधे तौर पर विशेषाधिकार हनन का निष्कर्ष निकालने से पहले यह देखना जरूरी होता है कि आमंत्रण भेजा गया था या नहीं और संबंधित प्रोटोकॉल का वास्तव में पालन हुआ या नहीं।


अब विभाग और प्रशांत किशोर के जवाब का इंतजार


फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि प्रशांत किशोर को उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया गया था या नहीं।
अगर आमंत्रण दिया गया था, तो उनकी गैरमौजूदगी की वजह क्या रही? अगर आमंत्रण नहीं दिया गया था, तो स्थानीय विधायक को कार्यक्रम से दूर रखने की वजह क्या थी? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और खुद प्रशांत किशोर ही स्पष्ट रूप से दे सकते हैं।


यही वजह है कि मीठापुर-सिपारा एलिवेटेड रोड के उद्घाटन से ज्यादा फिलहाल बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर की गैरमौजूदगी चर्चा में है।