RCP सिंह कि बेटी नालंदा के इस विधानसभा से लड़ सकती है चुनाव, सियासी चर्चा तेज ..

पटना से राहुल कि रिपोर्ट

बिहार के चुनावी माहौल में इस वक्त एक चर्चा तेज हो रही है जिसमें कभी मुख्यमंत्री नीतीश ख़ासमोखास रहे अब प्रशांत किशोर कि पार्टी जनसुराज के नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी कि बेटी नालंदा जिले के अस्थावां विधानसभा से जनसुराज के सिंबल लड़ सकती है चुनाव ? नालंदा जिले कों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गढ़ कहा जाता है, नीतीश के गढ़ में सेंधमारी कर पायेगी जनसुराज? पढ़िए इनसाइड स्टोरी …

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़ासमोखास रहे आरसीपी सिंह जिन्होंने बीते दिनों प्रशांत किशोर कि पार्टी जनसुराज दामन थाम लिया इसके बाद बिहार के सियासत में खूब चर्चा हुई थी अब आरसीपी सिंह कि छोटी बेटी एडवोकेट लता सिंह कों लेकर बिहार कि सियासी गलियारों में चर्चा खूब हो रही है चर्चा यह है कि जनसुराज नेता आरसीपी सिंह चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि उनकी छोटी बेटी एडवोकेट लता सिंह जनसुराज से अस्थावां विधानसभा से उम्मीदवार हो सकती है।

क्या है अस्थावां विधानसभा का राजनीतिक माहौल

अस्थावां, बिहार के नालंदा जिले का एक प्रखंड है, नालंदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गढ़ कहा जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक प्रभाव अस्थावां पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. 2001 के बाद से उनकी पार्टी यहां कभी नहीं हारी है समता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) ने इस सीट पर लगातार छह बार जीत दर्ज की है.दिलचस्प बात यह है कि आज तक अस्थावां विधानसभा में भाजपा और राजद आज तक अस्थावां में कोई प्रभाव नहीं बना सकी हैं.

जद(यू) के जितेन्द्र कुमार अब तक अस्थावां से पांच बार जीत चुके हैं।

2005 से चुनावी राजनीति में सक्रिय जद(यू) के जितेन्द्र कुमार अब तक अस्थावां से पांच बार जीत चुके हैं. उनके पिता अयोध्या प्रसाद ने भी 1972 और 1980 में कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से जीत दर्ज की थी. 2020 के विधानसभा चुनाव में जितेन्द्र कुमार ने राजद के अनिल कुमार को 11,600 वोटों से हराया.

कौन है आरसीपी सिंह ?

आरसीपी की गिनती कभी जदयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद नंबर दो वाले ओहदे पर होती थी। वह पार्टी के नीति निर्धारक भी रहे हैं। नीतीश ने आरसीपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे सर्वसम्मति से तमाम सदस्यों ने समर्थन दिया। नीतीश कुमार के कई अहम फैसलों में आरसीपी सिंह की महत्‍वपूर्ण भूमिका रही है। आरसीपी सिंह ने 17 साल तक नीतीश कुमार के साथ काम किया है। वे नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के निवासी हैं। पार्टी में अनबन होने के बाद जदयू अगस्त 2022 से अलग होकर मई 2023 में भाजपा में शामिल गये जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजद से अलग होकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई तो आरसीपी का कद घट गया। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से टिकट पाने की कोशिशें भी विफल रहीं तो आरसीपी सिंह ने आप सबकी आवाज नाम से अपनी पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया. अब आरसीपी ने अपनी पार्टी का जन सुराज में विलय कर दिया. पिछले तीन साल में देखें तो पहले जेडीयू, फिर बीजेपी और आसा के बाद अब जन सुराज आरसीपी सिंह की चौथी पार्टी है।