सनातन धर्म के अनुसार अभी पितृपक्ष चल रहा है. ग्रंथों में लिखा है कि पितृपक्ष में गयाजी में पिंडदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है. इसीलिए पितृपक्ष में देश-विदेश से लाखों पिंडदानी गयाजी पहुंच रहे हैं इसी क्रम में बीते कल भारत के प्रसिद्ध बिजनेसमैन मुकेश अंबानी अपने पिता धीरूभाई अंबानी का पिंडदान करने गयाजी पहुंचे थे. आज देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने परिवार के साथ गयाजी पहुंची जहां उन्होंने अपने पति और पुत्रो सहित पितरों का पिंडदान किया. इस दौरान गया एयरपोर्ट से लेकर विष्णुपद मंदिर तक का क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गया एयरपोर्ट पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आगवानी की. गया एयरपोर्ट से वो सीधे विष्णुपद मंदिर पहुंची, जहाँ 2 घंटे रुककर राष्ट्रपति ने अपने पितरों का पिंडदान किया. इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक दिवसीय पिंडदान की परंपरा निभाई. उन्होंने विष्णुपद, फल्गु नदी और अक्षयवट (मंदिर परिसर स्थित ) स्थानों पर पिंडदान किया. इसके बाद विष्णुपद मंदिर में जाकर विष्णु चरण के दर्शन कर आशीर्वाद लिया.
गयाजीपाल पंडा राजेश लाल कटरियार ने बताया, राष्ट्रपति का पैतृक घर ओडिशा के मयूरभंज में है. राष्ट्रपति मुर्मू के परिवार से बहुत पहले भी एक सदस्य गया जी आकर पिंडदान कर चुके हैं। हालांकि, यह पहला मौका होगा जब खुद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पिंडदान के लिए गयाजी आई हैं. हालांकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का गया जी का राष्ट्रपति रहते ये दूसरा दौरा है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एक दिवसीय गयाजी यात्रा के दौरान अनोखी घटना घटी. यह घटना बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से जुड़ी हुई है. बिहार के राज्यपाल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ विष्णुपद मंदिर तक पहुंचे उसके बाद वहां से वो लौट गए. इसके पीछे का कारण ये है की मंदिर परिसर मे अहिंदू व्यक्ति का प्रवेश निषेध है. इस बात को मंदिर परिसर के गेट पर कई भाषाओं मे अंकित किया गया है. राज्यपाल ने इस नियम का सम्मान किया.
साल 2022 के 23 अगस्त को नीतीश सरकार के मंत्री ने इस नियम का अपमान किया था. इसके बाद खूब बवाल मचा था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गया पहुंचे थे. वहां मंदिर के गर्भगृह में मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना की. वहीं उनके उस वक़्त बिहार के सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री इसराइल मंसूरी भी मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंच गए थे. इसको लेकर पंडा समाज और हिन्दू संगठनों ने विरोध जताया था. पंडा समाज ने गर्भगृह का फल्गु नदी के जल से शुद्धिकरण किया और फिर पूजा अर्चना शुरू हुई थी.
अब आपको बताते हैं कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए गयाजी में पिंडदान कितना मार्मिक रहा होगा. दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की निजी जिंदगी भी बेहद संघर्ष भरी रही है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कुल तीन बच्चे थे, दो बेटे और एक बेटी. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन साल 2009 में जैसे मुर्मू की जिंदगी को किसी की नजर लग गई! उनके बेटे का निधन हो गया। अभी वो इस दुख से उबर पातीं कि 4 साल बाद 2013 में ही दूसरा बेटा भी गुजर गया. इसके अगले साल ही मुर्मू के पति श्याम चरण का भी निधन हो गया. आज अपनी इकलौती बेटी के साथ अपने दोनों बेटे और पति का पिंडदान करने वो गयाजी पहुंची हुई थीं.

