बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शपथ लिए एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान उन्होंने राज्य के आम नागरिकों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और पार्टी नेताओं से लगातार मुलाकात की है। हालांकि, अब तक उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नहीं हुई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
क्या है पूरी स्थिति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी मुख्यमंत्री का शपथ के तुरंत बाद प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से मिलना कोई अनिवार्य परंपरा नहीं है। कई बार व्यस्त कार्यक्रम, विधानसभा सत्र, प्रशासनिक प्राथमिकताएं और राज्य से जुड़े जरूरी फैसले पहले आते हैं।
बीजेपी का क्या कहना है?
भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) के वरिष्ठ नेताओं ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा है कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय पूरी तरह पार्टी नेतृत्व की सहमति से लिया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों शामिल थे। पार्टी का कहना है कि “पसंद-नापसंद” जैसी बातें केवल राजनीतिक अफवाह हैं।
शपथ ग्रहण में अनुपस्थिति पर क्या वजह?
सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि सूत्रों के अनुसार, उस समय उनका पूर्व निर्धारित कार्यक्रम था, जिसके कारण वे शामिल नहीं हो सके। इसके अलावा, सभी बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का हर शपथ समारोह में शामिल होना भी जरूरी नहीं होता।
👉सूत्रों के अनुसार, जल्द ही सम्राट चौधरी दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं।
👉यह मुलाकात राज्य के विकास, केंद्र-राज्य समन्वय और आगामी योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
👉पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इसमें किसी तरह की नाराजगी या मतभेद की बात नहीं है।
निष्कर्ष
फिलहाल, सम्राट चौधरी के पीएम और गृह मंत्री से न मिलने को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, वे ज्यादा तर अटकलों पर आधारित हैं। राजनीतिक प्रक्रियाओं में इस तरह की देरी सामान्य मानी जाती है और इसे किसी बड़े मतभेद से जोड़कर देखना सही नहीं है।

