बिहार की सियासत इन दिनों एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री बने अभी सम्राट चौधरी को कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में उनके फैसलों ने न सिर्फ विपक्ष बल्कि अपनी ही पार्टी के अंदर हलचल पैदा कर दी है। खासकर पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा से जुड़े दो बड़े फैसलों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
पहला बड़ा फैसला—विजय सिन्हा की सुरक्षा में कटौती, और दूसरा—उनके कार्यकाल में लिए गए कड़े प्रशासनिक निर्णयों को पलटना। इन दोनों कदमों को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे भाजपा के अंदर भी खींचतान की अटकलें लगाई जा रही हैं।
दरअसल, सम्राट चौधरी सरकार ने हाल ही में हड़ताल के दौरान निलंबित किए गए 224 से अधिक राजस्व कर्मियों का सस्पेंशन रद्द कर दिया है। यह वही कर्मचारी हैं जिन्हें विजय कुमार सिन्हा ने उस समय सख्त कार्रवाई करते हुए निलंबित किया था, जब वे उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री थे। उस समय सरकार ने हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ा रुख अपनाया था।
मामला यहीं नहीं रुकता। 11 फरवरी 2026 से शुरू हुई राजस्व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान पहले 224 कर्मियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद 9 मार्च से अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी भी हड़ताल पर चले गए, जिनमें से 45 से ज्यादा अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई। अब सम्राट सरकार ने इन सभी के निलंबन को वापस लेकर एक नरम रुख दिखाया है।
इस फैसले के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या सम्राट चौधरी प्रशासनिक सख्ती से हटकर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, या फिर यह उनके और विजय सिन्हा के बीच राजनीतिक संदेश है?
सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से विजय सिन्हा नाराज बताए जा रहे हैं, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है। लेकिन सियासी हलकों में उस समय हलचल और बढ़ गई जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी खुद विजय सिन्हा के आवास पर उनसे मुलाकात करने पहुंचे। इस मुलाकात की तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया पर आईं, यह माना जाने लगा कि पार्टी स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम भाजपा के अंदर शक्ति संतुलन और नेतृत्व की दिशा को भी संकेत देता है। एक तरफ सम्राट चौधरी अपने फैसलों से प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर सामंजस्य बनाए रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में यह अंदरूनी खींचतान शांत होती है या फिर बिहार की राजनीति में कोई बड़ा मोड़ लेकर आती है।

