बांकीपुर में महुआ जैसी कहानी दोहराएगी? PK और BJP की टक्कर में RJD को फायदा!

पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा उम्मीदवार बदले जाने के बाद चुनावी समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टिकट परिवर्तन के बाद भाजपा पहले जैसी आक्रामक स्थिति में नहीं दिख रही। पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता भी फिलहाल संयमित रुख अपनाए हुए हैं।


जानकारों का मानना है कि पहले भाजपा खेमे में जीत को लेकर काफी आत्मविश्वास था, लेकिन अब मुकाबले को कड़ा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जन सुराज का संगठन भले ही भाजपा जितना मजबूत नहीं माना जाता हो, लेकिन प्रशांत किशोर प्रत्याशी के रूप में चुनाव को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा की संगठनात्मक ताकत बरकरार है, हालांकि उम्मीदवार बदलने के फैसले ने विपक्ष को सवाल उठाने का अवसर दे दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अंदर भी यह चर्चा है कि यदि उम्मीदवार चयन संगठन की व्यापक राय से होता, तो विवाद की स्थिति शायद नहीं बनती। हालांकि भाजपा को अनुशासित संगठन माना जाता है और पार्टी कार्यकर्ता अंततः अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में पूरी ताकत से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट जाते हैं।


राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब भाजपा को पूरी तरह चुनावी मोड में उतरकर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना होगा। उनका मानना है कि चुनाव सिर्फ मजबूत उम्मीदवार नहीं, बल्कि मजबूत संगठन भी जिताता है।


इधर, राजनीतिक हलकों में 2025 के महुआ विधानसभा चुनाव की भी चर्चा हो रही है। उस चुनाव में मुख्य मुकाबला राजद के मुकेश रौशन और तेजप्रताप यादव के बीच माना जा रहा था, लेकिन अंत में लोजपा (रामविलास) के संजय सिंह ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया था। इसी वजह से बांकीपुर को लेकर भी ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा और जन सुराज के बीच सीधी टक्कर का फायदा कहीं राजद को न मिल जाए।

हालांकि चुनावी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। सभी दल अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटे हैं और अंतिम फैसला मतदाताओं के मतदान के बाद ही सामने आएगा।