पटना में ऑल पी-एच.डी. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन के नेतृत्व में चल रहे आमरण अनशन और धरने के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाला। इस दौरान अभ्यर्थियों ने बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष गिरीश चौधरी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और लोक भवन के सचिव दीपक कुमार के पुतले का दहन किया।
प्रदर्शनकारियों की ओर से पुतला दहन का कार्यक्रम सप्तमूर्ति के समीप प्रस्तावित था। हालांकि, मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती और प्रशासनिक दबाव के चलते प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित स्थान पर जाने के बजाय धरना स्थल के मुख्य गेट के पास ही पुतला दहन किया।
नियमावली 2026 को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार में लागू की जा रही नियमावली 2026 यूजीसी के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में रिसर्च पब्लिकेशन को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है और उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों के मुताबिक नई नियमावली में अनुभव को नजरअंदाज करने के साथ मैट्रिक और इंटर के अंकों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। वहीं, पी-एच.डी. के लिए निर्धारित वेटेज को 30 अंक से घटाकर 11 अंक किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।
उम्र सीमा घटाने पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने उम्र सीमा में किए गए बदलाव का भी विरोध किया। उनका कहना है कि पिछली नियुक्तियों में अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष तक थी, जिसे अब अचानक घटाकर 43 वर्ष कर दिया गया है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि इस बदलाव से लंबे समय से विश्वविद्यालयों में नियुक्ति का इंतजार कर रहे कई योग्य उम्मीदवार प्रभावित होंगे।
यूजीसी के नियमों की अनदेखी का आरोप
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि देश के विश्वविद्यालयों में यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियुक्ति और शैक्षणिक प्रक्रिया निर्धारित की जाती है, लेकिन बिहार की नई व्यवस्था में इन मानकों की अनदेखी की गई है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मैट्रिक और इंटर के अंकों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने से दूसरे राज्यों से एमए की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को लाभ मिल सकता है, जबकि बिहार के उच्च डिग्रीधारी उम्मीदवारों के हित प्रभावित होंगे।
कई अन्य मांगों को लेकर भी आंदोलन
आंदोलनकारियों ने अंगिका, भोजपुरी और मगही विषयों के लिए पीएटी आयोजित कराने की मांग भी उठाई। इसके अलावा सभी विषयों में बैट परीक्षा शुरू करने, गेस्ट फैकल्टी के समायोजन और विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेजों को अलग नहीं करने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।
पुतला दहन में शामिल हुए सैकड़ों प्रदर्शनकारी
पुतला दहन कार्यक्रम में डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. आलोक तिवारी, डॉ. राधेश्याम, डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. विभुरंजन, डॉ. रवि कुमार, डॉ. देवानंदन यादव, चंदन कुमार, आशीष कुमार, डॉ. विशाल सिंह, सिद्धार्थ पटेल, मो. नेमतुल्ला, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. अंकित तिवारी, डॉ. विभाग रानी, डॉ. शोभा कुमारी, वंदना सिंह, डॉ. सूची स्मिता और डॉ. स्नेहा कुमारी समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद रहे।
आठवें दिन भी आमरण अनशन जारी
इधर, अपनी मांगों को लेकर कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बिक्कू सिंह प्रधान का आमरण अनशन भी जारी है। आंदोलनकारियों के अनुसार तीनों अनशनकारी लगातार आठवें दिन धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
