गया से एस.के.उल्लाह की रिपोर्ट
गया जिले में 13 करोड़ की लागत से बने करीब चार सौ मीटर लम्बे पुल के एक खंभे के धंस जाने के कारण बवाल मच गया. ग्रामीणों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने पुल निर्माण में भ्रष्टाचार और अनियमितता को इस का कारण बताते हुए मामले की जांच कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। तत्काल तकनीकी अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पुल का निरीक्षण कर उस पर भारी वाहनों का परिचालन रोक दिया है। मजे की बात तो यह है कि तीन साल पूर्व बने इस पुल का अबतक विधिवत उदघाटन भी नहीं हुआ था, हालांकि इस पुल से वाहनों का गुजरना चालू हो चुका था।
तीन साल में 19 पुल धंसने के मामले आ चुके हैं सामने
पुल धंसने की ताजा घटना से लोगों के जेहन में सूबे में विभिन्न स्थानों पर पुलों के गिरने-ढहने की यादें ताजा हो गई हैं। आंकड़ोें के मुताबिक तीन सालों में राज्य के विभिन्न जिलों में 19 छोटे-बड़े पुलों के गिरने ढहने के मामले सामने आ चुके हैं।
निलाजन नदी का पुल हुआ क्षतिग्रस्त
नवीनतम मामला डोभी से चतरा को जोड़ने वाली एनएच-99 सड़क पर डोभी प्रखंड के कोठवारा गांव के करीब से बरिया-रहमान नगर होते हुए झारखंड के सरहदी गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर निलाजन नदी के ऊपर बने पुल से जुड़ा है। इस पुल का निर्माण वर्ष 2022 में पूरा हुआ था। ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्लुडी) के शेरघाटी डिवीजन की देखरेख में पुल का निर्माण जहानाबाद की कंस्ट्रक्शन कम्पनी श्री तिरूपति बालाजी इंटरप्राइजेज के द्वारा किया गया था। वर्ष 2015 में इस पुल के निर्माण का शिलान्यास किया गया था, मगर तीन साल तक काम शुरु ही नहीं हुआ। निर्माण पूरा होने के पहले भी बारिश के दिनों में पुल के एक हिस्से में दरारें उभर आई थीं, मगर किसी जांच के बगैर तब भी मामले की लीपापोती कर दी गई थी। अधिकारियों ने किया क्षतिग्रस्त पुल का मुआयना
शुक्रवार को शेरघाटी के एसडीओ मनीष कुमार के अलावा कई तकनीकी अधिकारियों ने भी क्षतिग्रस्त पुल का मुआयना किया है। अधिकारियों ने पुल के दोनों ओर बैनर लगाकर भारी वाहनों के परिचालन की मनाही कर दी है। साथ ही पुल पर नजर रखी जा रही है। इससे पूर्व गुरुवार को पुल की सतह में दरारें सामने आने पर आरडब्लुडी के गया स्थित अधीक्षण अभियंता प्रेमप्रकाश रंजन के अलावा स्थानीय अभियंताओं ने भी पुल की दरारों का निरीक्षण किया था। पुल निर्माण करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधि को भी बुलाया गया था।
आरडब्लुडी ने निर्माण कम्पनी को दी क्लिन चिट
पुल पर वाहनों का परिचालन बंद हो जाने के बावजूद आरडब्लुडी यह मानने को तैयार नहीं है कि पुल निर्माण में किसी तरह की कोई गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ था। आरडब्लुडी के शेरघाटी के डिवीजन में तैनात कार्यपालक अभियंता ब्रजकिशोर प्रसाद ऐसी तमाम शिकायतों और आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि पुल के एक्सपैंशन ज्वाइंट में दरारें आई हैं। विभागीय जांच दल इस का पता लगाएगा कि इसका कारण क्या है, वैसे प्रथमदृष्टया ऐसा लग रहा है कि पुल के आस पास से बालू के उठाव के कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने पुल निर्माण एजेंसी को भी क्लिन चिट देते हुए कहा कि तत्काल ऐसी कोई गड़बड़ी सामने नहीं आइ है, जिसके लिए पुल निर्माण करने वाली एजेंसी को जिम्मेवार ठहराया जा सके। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि पुल को कबतक आवागमन के लिए फिर से तैयार कर दिया जाएगा।
जन प्रतिनिधियों का है क्या आरोप
दूसरी तरफ जदयू के वरीय नेता और पूर्व मंत्री विनोद प्रसाद यादव कहते हैं कि जिस तरह से पुल धंसा है। यह साफ है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया और सरकार की बड़ी रकम बर्बाद हो गई। पुल पर यातायात बंद होने से बिहार-झारखंड के सीमावर्ती इलाके के सैंकड़ों गांवों तक पहुंच में गतिरोध आ गया है। इस मामले की कड़ाई से जांच कर गड़बड़ी के लिए जवाबदेह लोगों को दंडित किए जाने की जरूरत है। लोजपा के वरीय नेता और गया जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष तथा एनडीए के शेरघाटी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी रहे कृष्णा यादव भी पुल में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की बात कहते हैं। डोभी प्रखंड की बीससूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष और जदयू नेता सुरेंद्र प्रसाद यादव भी पुल में आइ दरार को भ्रष्टाचार का नतीजा बताते हैं।
गुणवत्ता का सवाल उठाने वालों पर दर्ज हुआ था मुकदमा
डोभी प्रखंड की खरांटी ग्राम कचहरी के सरपंच उपेंद्र यादव कहते हैं कि इस पुल को तो धंसना-ढहना ही था। स्थानीय लोगों को तो ताज्जुब इस बात का है कि इसमें दरारें आने में इतना देर क्यों हुई। इसकी वजह बताते हुए वह कहते हैं कि वर्ष 2020 में पुल निर्माण के समय जब पुल के खंभोें को तैयार किया जा रहा था तो ग्रामीणों ने इस बात का प्रतिवाद किया था कि पुल के खंभों की गहराई प्राक्कलन में वर्णित गहराई से कम है। घटिया निर्माण सामग्रियों के उपयोग के साथ छड़, सिमेंट, छर्री और बालू के मिश्रण के लिए तय अनुपात में भी कटौती की गई थी। सारा काम रात में और इंजीनियरों की मौजूदगी के बगैर किया गया था। बालू में भीस और मिट्टी की मात्रा अधिक थी। तब ग्रामीणों के प्रतिरोध को कुचलने-दबाने के लिए कंस्ट्रक्शन कम्पनी के मालिक योगेंद्र शर्मा ने सरपंच उपेंद्र यादव के साथ ग्रामीणों के खिलाफ पैसा छीनने और मैनेजर को बंधक बनाने का झूठा आरोप लगाकर बाराचट्टी थाने में मुकदमा (91/20) तक दर्ज करा दिया था।तब भी ग्रामीणों ने प्रतिरोध नहीं छोड़ा। निर्माण में गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ की शिकायतें हर जगह कीं। तत्कालीन विधायक विनोद यादव भी पुल निर्माण देखने आए, जिन्हें ग्रामीणों ने सबकुछ दिखाया और बताया। विधायक ने भी इंजीनियरों को गड़बड़ी की इत्तिला दी, मगर कार्रवाई तो क्या जांच तक नहीं हुई। डर से ग्रामीण भी शांत हो गए। नतीजा अब सामने आया है।
2022 में शुरु हुआ था पुल धंसने का सिलसिला
राज्य में यह कोई पहला मामला नहीं है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 से अबतक कम से कम 19 पुलों के क्षतिग्रस्त होने या गिरने-ढहने की बातें सामने आई हैं। जुलाई 2024 में तो चौबीस घंटे के दौरान सीवान और छपरा जिले में पांच पुलों के गिरने की बातें सामने आई थीं। तब बिहार में पुलों के गिरने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। हालांकि उच्चतम न्यायालय में सिर्फ 12 पुलों के गिरने की बात ही कही गई थी। जाहिर है पुलों के धड़ाधड़ गिरने से विपक्ष भी गुणवत्ता की कमी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सरकार के खिलाफ हमलावर हो गया था, सीबीआई से जांच तक की मांग उठी थी। जबकि सूबे की सरकार के मुखिया नीतीश कुमार ने आरसीडी और आरडब्लुडी जैसे विभागों को सभी पुराने तथा निर्माणाधीन पुलों का तुरंत सर्वेक्षण करने और कमजोर पुलों की पहचान कर उसकी मरम्मत का आदेश दिया था। कार्रवाई के नाम पर तो अबतक सन्नाटा है।
पुलों के गिरने की महत्वपूर्ण घटनाएं
9 जून 22- सहरसा (सिमरी-बख्तियारपुर) में निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरा
20 मई 22- फतुहा-पटना के पास 1884 में बना ब्रिटिशकालीन पुल बारिश में ढहा
18 नवम्बर 22- नालंदा में निर्माणाधीन सड़क पुल ध्वस्त
16 जनवरी 23- दरभंगा का लोहे का पुल ओवरलोडेड ट्रक के गुजरने से गिरा
19 फरवरी 23- बिहटा-सरमेरा (पटना) फोरलेन पुल गिरा
19 मार्च 23- सारण जिले का पुराना सड़क पुल ध्वस्त
4 जून 23- भागलपुर (सुल्तानगंज-अगुवानी) निर्माणाधीन पुल गिरा
22 मार्च 24- सुपौल (कोसी नदी पर भारतमाला परियोजना) में निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा गिरा
18 जून 24- अररिया के सिकटी में बकरा नदी पर बना नया पुल गिरा
3-4 जुलाई 24- चौबीस घंटे में सीवान और छपरा में पांच पुल गिरे

