पटना। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा बुधवार को सूचना भवन के संवाद कक्ष में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को विभागीय मंत्री संजय कुमार सिंह ने संबोधित किया। इस दौरान विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार सहित कई अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं और कार्यों की जानकारी दी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार द्वारा बिहार में खराब पड़े चापाकलों को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर जवाब देते हुए प्रधान सचिव राजेश कुमार ने बताया कि राज्य में करीब 86 हजार चापाकल खराब पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इनकी मरम्मत के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जो युद्ध स्तर पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि आपदा विभाग की ओर से राज्य में 6 हजार नए चापाकल लगाए जाने हैं, जिनमें अब तक करीब 1 हजार चापाकल लगाए जा चुके हैं। बाकी चापाकलों को जल्द से जल्द लगाने की तैयारी तेज़ी से चल रही है। प्रधान सचिव ने कहा कि चापाकल ऐसी व्यवस्था है, जो समय-समय पर खराब हो सकती है। विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि किस प्रकार के चापाकल भविष्य में अधिक उपयोगी और टिकाऊ साबित होंगे।
वहीं मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2015 में हर ग्रामीण परिवार तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुँचाने की परिकल्पना की थी। वर्ष 2016 से “हर घर नल का जल” योजना की शुरुआत हुई। वर्तमान में बिहार के लगभग 93 प्रतिशत परिवारों तक घर-घर जल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में जहां केवल 2.66 लाख परिवारों तक नल का जल पहुंचा था, वहीं वर्ष 2026 तक यह संख्या बढ़कर 1.87 करोड़ से अधिक हो गई है। विभाग का लक्ष्य 2.02 करोड़ परिवारों तक पेयजल सुविधा पहुंचाना है।
मंत्री ने बताया कि राज्य के कुल 1,14,450 वार्डों में जलापूर्ति योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें विभाग के अंतर्गत 50,081 योजनाएं तथा पंचायती राज विभाग से हस्तांतरित 70,157 योजनाएं शामिल हैं।
इसके साथ ही विभाग द्वारा शिकायत निवारण के लिए केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (CGRC) संचालित की जा रही है। नागरिक टोल फ्री नंबर, मोबाइल ऐप, वेबसाइट, व्हाट्सऐप और ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आम लोग सीधे विभाग के प्रधान सचिव के मोबाइल नंबर 9473191466 पर कॉल या व्हाट्सऐप के जरिए भी शिकायत कर सकते हैं।
विभाग के अनुसार अगस्त 2025 से मई 2026 तक CGRC में 1.54 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से लगभग 1.46 लाख शिकायतों का समाधान किया जा चुका है।

