पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान हनुमान जी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में विशेष रूप से दो तरह के प्रसाद की चर्चा होती है — बेसन का लड्डू और नैवेद्यम लड्डू। इनमें नैवेद्यम लड्डू को मंदिर कमिटी द्वारा तैयार कराया जाता है, जबकि बेसन के लड्डू के लिए कई निजी स्टॉल मौजूद हैं।
अब महावीर मंदिर के प्रसिद्ध नैवेद्यम प्रसाद को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। पटना विश्वविद्यालय के चर्चित रिटायर प्रोफेसर और “लव गुरु” के नाम से प्रसिद्ध मटुकनाथ चौधरी ने नैवेद्यम लड्डू के स्वाद को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की है।
मटुकनाथ चौधरी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा,
“कुणाल साहब के जाने के इतने दिनों बाद अब पटना महावीर मंदिर का लड्डू, लड्डू न रहा, हलुवा हो गया है! सूरज डूबा है तो अंधेरा तो होगा ही। कोई आश्चर्य की बात तो नहीं।”
इस मामले पर जब PO भारत के प्रतिनिधि ने प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि वह महावीर मंदिर में पूजा करने नहीं जाते, लेकिन वहां का नैवेद्यम प्रसाद उन्हें बेहद पसंद है।
उन्होंने कहा, “मैं जब भी उस इलाके से गुजरता हूं तो नैवेद्यम प्रसाद जरूर ले लेता हूं। इस बार जो प्रसाद लिया उसमें पहले वाला स्वाद नहीं था। बिल्कुल हलवा जैसा लग रहा था। कुणाल साहब जब तक जीवित रहे तब तक नैवेद्यम प्रसाद में गजब का स्वाद था। अब वो स्वाद नहीं है, इसलिए मैंने फेसबुक पोस्ट किया।”
बता दें कि महावीर मंदिर का नैवेद्यम प्रसाद लोगों की आस्था, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 1993 में इसकी शुरुआत हुई थी और पिछले 25 वर्षों में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। श्रद्धालु इसे भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद स्वरूप घर ले जाते हैं। कई लोग इसे साधारण मिठाई नहीं बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा विशेष प्रसाद मानते हैं।
हालांकि अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस नैवेद्यम प्रसाद के स्वाद और शुद्धता की लोग मिसाल देते थे, उसी को लेकर इस तरह की शिकायतें क्यों सामने आने लगी हैं। एक चर्चित प्रोफेसर द्वारा सार्वजनिक तौर पर स्वाद में बदलाव की बात कहना मंदिर प्रशासन के लिए भी सोचने का विषय बन गया है।
फिलहाल मंदिर प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रसाद की गुणवत्ता और स्वाद को लेकर मिलने वाले फीडबैक पर ध्यान देना जरूरी है।

