बिहार की सियासत इस साल होली के रंग में जमकर भीगी थी। भाजपाइयों के गालों पर भगवा गुलाल चढ़ा था, जबकि JDU खेमे में सन्नाटा नजर आ रहा था। वजह थी—नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा और सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना।
अब दीपावली आने वाली है और इसी बीच BJP की दो ऐसी गलतियों की चर्चा शुरू हो गई है, जिन्हें लेकर NDA में सबकुछ ‘ऑल इज़ वेल’ नहीं होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
पहली गलती—बिहार म्यूजियम का श्रेय PM मोदी को देना
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बिहार म्यूजियम को लेकर एक ट्वीट किया। उन्होंने बिहार म्यूजियम की उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।
इसके बाद JDU समर्थकों की ओर से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिली। उनका कहना है कि बिहार म्यूजियम का निर्माण नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुआ था, इसलिए इसका श्रेय उन्हें मिलना चाहिए।
यानी BJP के एक ट्वीट ने बिहार की सियासत में श्रेय लेने की पुरानी राजनीतिक बहस को फिर हवा दे दी है।
दूसरी गलती—दो निर्दलीय MLC का BJP में शामिल होना
बिहार में हाल ही में आठ सीटों पर हुए MLC चुनाव के बाद दो निर्दलीय निर्वाचित विधान पार्षद—राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी—BJP में शामिल हो गए।
खास बात यह है कि दोनों ने चुनाव में NDA के सहयोगी दल JDU के उम्मीदवारों को हराकर जीत दर्ज की थी। चुनाव के कुछ ही दिनों बाद दोनों का BJP में शामिल होना बिहार के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
BJP की नजर से ये दोनों घटनाएं सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम लग सकती हैं, लेकिन बिहार की गठबंधन राजनीति को समझने वाले लोग इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं। सवाल यही है कि क्या इन घटनाओं से BJP और JDU के बीच दूरी बढ़ सकती है?
अगर BJP इन मुद्दों पर JDU को संतुष्ट नहीं कर पाती है, तो क्या बिहार की मौजूदा सत्ता के समीकरण पर इसका असर पड़ेगा? यही सवाल अब राजनीतिक गलियारों में उठ रहा है।
उधर RJD की नजर सत्ता के समीकरण पर है।
RJD की कोशिश लगातार सत्ता के समीकरण में जगह बनाने की रही है। अगर भविष्य में JDU और RJD के बीच कोई राजनीतिक समीकरण बनता है, तो मुख्यमंत्री निशांत कुमार बनेगें.
वहीं JDU के अंदर नेतृत्व को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं। निशांत कुमार को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। फिलहाल वे मंत्री हैं, लेकिन अगर भविष्य में उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाता है तो JDU की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।
हालांकि ये सभी बातें फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और संभावनाओं के स्तर पर हैं। बिहार की राजनीति में समीकरण कब बदल जाएं, यह कहना आसान नहीं है।
क्योंकि बिहार की सियासत को लेकर ये कहावत ठीक बैठता है…नदी में तैरता मगरमच्छ कब करवट ले ले, इसका अंदाजा नदी को भी नहीं होता।
सुजीत पाण्डेय बिहार के अनुभवी पत्रकार हैं। वे ETV भारत में गया जिला रिपोर्टर एवं डिस्ट्रिक्ट कंटेंट एडिटर के रूप में चार वर्षों तक कार्य कर चुके हैं। इसके बाद Dailyhunt के Public Vibe News App में मगध क्लस्टर हेड की जिम्मेदारी संभाली। पिछले तीन वर्षों से वे PO भारत के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
